शुक्रवार व्रत — संतोषी माता का व्रत

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शुक्रवार व्रत — संतोषी माता का व्रत

संतोषी माता को समर्पित शुक्रवार व्रत — इसका मूल, परंपरागत सोलह शुक्रवार आचार, चना-गुड़ प्रसाद, तथा खट्टा-निषेध का प्रसिद्ध नियम।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

शुक्रवार — शुक्र (शुक्र ग्रह) से नामांकित। लोक हिंदू परंपरा में संतोषी माता — संतोष की देवी — को समर्पित। शुक्रवार प्राचीन ग्रंथों में लक्ष्मी, सरस्वती एवं दुर्गा से सम्बद्ध रहा है, परंतु संतोषी माता का विशिष्ट शुक्रवार व्रत बीसवीं शताब्दी में, विशेषकर 1975 की 'जय संतोषी माँ' फिल्म के बाद, व्यापक लोकाचार बना।

व्रत-स्वरूप

शास्त्रीय आचार है सोलह शुक्रवार व्रत — सोलह क्रमिक शुक्रवार। लघु आचार एक से चार शुक्रवार तक भी।

दैनिक विधि

  1. 1**प्रात:स्नान**, स्वच्छ वस्त्र (पीला अथवा लाल)।
  2. 2**संकल्प** — पालक संक्षिप्त मानसिक संकल्प में शुक्रवारों की संख्या एवं उद्देश्य घोषित करता है।
  3. 3**पूजा** — संतोषी माता की छवि स्वच्छ वस्त्र पर। कलश पर नारियल। अर्पण: चना-गुड़ का छोटा ढेर, लाल पुष्प, धूप, दीप, एक मुद्रा।
  4. 4**कथा-पाठ** — संतोषी माता व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण। कथा सरल हिंदी गद्य में है तथा अनुष्ठान का हृदय है।
  5. 5**आरती** अंत में।
  6. 6**प्रसाद** — केवल अर्पित चना-गुड़ प्रसाद-रूप में। एक साथ ग्रहण करने से व्रत-पारणा।

खट्टा-निषेध

व्रत की सबसे विशिष्ट विशेषता: व्रत-दिवस को घर में कोई खट्टा वस्तु ग्रहण नहीं करता, विशेषतः पूजा के पश्चात्। नींबू, इमली, अमचूर, कुछ व्याख्याओं में दही — सब विरत। कथा-दत्त शास्त्रीय कारण: खट्टापन खिन्न मन, असंतोष का प्रतीक है; संतोष-देवी इससे स्वाभाविक रूप से विमुख हैं।

उद्यापन

संकल्पित संख्या पूर्ण होने पर उद्यापन। आठ बालक (कभी-कभी आठ वसुओं के रूप में व्याख्यायित) आमंत्रित कर भोजन कराया जाता है — परंतु पुनः बिना खट्टे के। तत्पश्चात् व्रत औपचारिक रूप से समाप्त।

व्रत का संवर्धन

भौतिक प्रार्थना के परे, विशिष्ट प्रयोजन (नौकरी, विवाह, ऋण-मुक्ति) हेतु पाला गया व्रत स्वयं संतोष का अनुशासन है। सोलह सप्ताह का खट्टा-निषेध दैनिक छोटी शिकायतों के अंकुश का छोटा परंतु वास्तविक अभ्यास है।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यदि घर में कोई भूल से खट्टा खा ले?

कोई बड़ा शास्त्रीय दण्ड नहीं। परंपरागत प्रतिक्रिया है देवी से संक्षिप्त क्षमा-याचना तथा निरंतर पालन। व्रत तकनीकी पूर्णता से ईमानदार भाव को अधिक मानता है।

क्या पुरुष शुक्रवार व्रत रख सकते हैं?

हाँ। व्रत में कोई लिंग-निषेध नहीं। इसके आधुनिक लोक-स्वरूप में स्त्रियाँ अधिक रखती हैं, परंतु मूल शास्त्रीय शुक्रवार व्रत (लक्ष्मी, दुर्गा हेतु) पूरे परिवार द्वारा पालित होते थे।

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॥ ॐ शुभं भवतु ॥