वसन्त पंचमी माघ शुक्ल पंचमी (ग्रेगोरियन में जनवरी-अंत अथवा फरवरी-आरंभ) पर। यह दिवस सरस्वती पूजा भी है — विद्या, संगीत, वाणी एवं कला की देवी को समर्पित। दोनों पहचानें संगत हैं क्योंकि सरस्वती की शास्त्रीय प्रतिमा — श्वेत-वस्त्रा, श्वेत-कमल पर, वर्ष के वसन्त का सूत्रधार — ऋतु के प्रथम आगमन से मेल खाती है।
✦ इसी दिवस सरस्वती क्यों?
ऋतु — वसन्त भारतीय शास्त्रीय ऋतु-गणना में ऋतुराज है। माघ की शीत के पश्चात् ऊष्मा का आगमन विश्व-मन के जागरण के रूप में अनुभूत — मन की देवी हेतु उपयुक्त दिवस।
ब्रह्माण्डिक — एक परंपरा कहती है कि इसी दिन ब्रह्मा ने सरस्वती की सृष्टि की ताकि मूक ब्रह्माण्ड को ध्वनि एवं अर्थ मिले। प्रथम वाणी, प्रथम संगीत — इसी दिन सरस्वती से प्रवाहित हुए।
शिक्षा — दिवस परंपरागत रूप से बालकों का विद्यारम्भ-दिवस है। शिशुओं का प्रथम लेखन इसी दिन; बड़े बालक नए विषयों का औपचारिक अध्ययन आरंभ करते हैं; वाद्य-संगीतज्ञों का नव-वर्ष का प्रथम सत्र।
✦ सरल विधि
- 1**पीला धारण** — सरसों खेतों का रंग, हल्दी, वर्ष की प्रथम हल्दी। पीले पुष्प, पीली मिठाई, पीले चावल — सब दिवस का अंग।
- 2**सरस्वती-वेदी** — सरस्वती-छवि (मुद्रित भी मान्य), श्वेत अथवा पीत वस्त्र पर। पास में परिवार के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण पुस्तकें, वाद्य-यंत्र, लेखन-उपकरण। विद्यार्थी परंपरागत रूप से अपनी सभी पाठ्य-पुस्तकें वेदी पर रखते हैं।
- 3**अर्पण** — पीले पुष्प, खीर, बूँदी-लड्डू, हल्दी, मिट्टी का दीप।
- 4**मंत्र** — "सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नमः। वेदवेदाङ्गवेदेभ्यो वेदमाता नमोऽस्तु ते॥"
- 5**विद्यारम्भ** — गृह में बालक हों तो प्रथम अक्षर (प्रायः ॐ अथवा श्री अथवा अपना प्रथम अक्षर) इस दिन वरिष्ठ के हाथ-संचालन से लिखाया जाता है।
- 6**आरती** दोपहर अथवा संध्या में, प्रसाद-वितरण।
✦ वर्जित
विरोधाभासी रूप से — वसन्त पंचमी पर अध्ययन कभी-कभी विरत। शास्त्रीय कारण: दिवस विद्या के स्रोत के सम्मान को है, उसके उपभोग को नहीं। अनेक विद्यार्थी प्रात: वेदी पर पुस्तकें रखते हैं तथा अगले दिन ही पठन पुनः आरंभ। विराम सांकेतिक है: ज्ञान सम्पत्ति-संचय नहीं, कृतज्ञता-पूर्वक स्वीकार किया जाने वाला उपहार है।
✦ वसन्त-भाव
कृषि भारत के लिए वसन्त पंचमी सरसों खेतों के पीले होने का दिवस, वायु में प्रथम ऊष्मा का संकेत, तथा होली (40 दिवस पश्चात्) एवं गेहूँ कटाई की ओर कृषि-मन का प्रथम मोड़। अनेक कृषक-गृह छोटी पतंगें उड़ाते हैं — पंजाब एवं गुजरात के भागों में लोक-परंपरा।