रक्षाबंधन — मूल, अर्थ एवं विधि

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रक्षाबंधन — मूल, अर्थ एवं विधि

श्रावणी पूर्णिमा का रक्षासूत्र पर्व — महाभारत एवं भविष्य पुराण में पौराणिक मूल, सरल विधि, तथा रक्षासूत्र का व्यापक हिंदू भाव।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

रक्षाबंधन — "रक्षासूत्र का बंधन" — श्रावण पूर्णिमा (ग्रेगोरियन में प्रायः अगस्त) पर। सरलतम रूप में बहन भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बाँधती है, उसके कल्याण की प्रार्थना करती है तथा भाई रक्षा का संकल्प लेता है।

पौराणिक मूल

महाभारत में जब सुदर्शन चक्र से कृष्ण की उँगली कट गई, द्रौपदी ने अपनी साड़ी का अंश फाड़कर बाँधा; कृष्ण ने ऋण-शोध का संकल्प किया जो द्यूत-सभा में पूर्ण हुआ। भविष्य पुराण में इन्द्राणी ने बलि-युद्ध से पूर्व इन्द्र की कलाई पर पवित्र सूत्र बाँधा था।

मध्ययुगीन लोक-परंपरा में पर्व को आज का भाई-बहन स्वरूप मिला। मेवाड़ की रानी कर्णावती द्वारा सम्राट हुमायूँ को राखी भेजकर सहायता-प्रार्थना की कथा सर्वविदित है।

व्यापक भाव

भाई-बहन के स्वरूप के परे रक्षाबंधन का व्यापक प्रयोग है। श्रावणी पूर्णिमा पर अनेक समुदायों में उपनयन / यज्ञोपवीत भी नवीनीकृत होता है। यज्ञ में पुरोहित यजमान की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधते हैं। सूत्र — पुराने अर्थ में — दो व्यक्तियों के बीच रक्षा-संकल्प का बंधन है।

सरल विधि

  1. 1**स्नान**, स्वच्छ वस्त्र, प्रात:काल परिवार-संगम।
  2. 2**राखी थाली** में राखी, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई।
  3. 3बहन **तिलक** करती है, **आरती** करती है, मौन प्रार्थना सहित दाहिनी कलाई पर **राखी बाँधती** है।
  4. 4भाई **उपहार** देता है तथा सहायता का संकल्प लेता है।
  5. 5**मिष्ठान्न-विनिमय**, पारिवारिक भोजन।

राखी का विसर्जन

राखी पर्व-दिवस एवं कुछ दिन धारण की जाती है। जब वह टूटने लगे, धीरे से उतारकर बहती जल में प्रवाहित कर दी जाए — सामान्य कूड़े में नहीं।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या राखी भाई के अतिरिक्त किसी और को बाँधी जा सकती है?

हाँ। रक्षासूत्र का मूल अर्थ रक्षा-संकल्प का बंधन है। राखियाँ सैनिकों, गुरुओं, मित्रों — किसी भी रक्षा-संबंधी को बाँधी जा सकती हैं।

राखी किस कलाई पर बाँधी जाती है?

दाहिनी कलाई पर। हिंदू अनुष्ठान में दक्षिण-पक्ष क्रियात्मक एवं धार्मिक है; पुरुषों एवं अविवाहित स्त्रियों के लिए रक्षासूत्र-कलावा-यज्ञसूत्र दाहिनी कलाई पर बाँधे जाते हैं।

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