रक्षाबंधन — "रक्षासूत्र का बंधन" — श्रावण पूर्णिमा (ग्रेगोरियन में प्रायः अगस्त) पर। सरलतम रूप में बहन भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बाँधती है, उसके कल्याण की प्रार्थना करती है तथा भाई रक्षा का संकल्प लेता है।
✦ पौराणिक मूल
महाभारत में जब सुदर्शन चक्र से कृष्ण की उँगली कट गई, द्रौपदी ने अपनी साड़ी का अंश फाड़कर बाँधा; कृष्ण ने ऋण-शोध का संकल्प किया जो द्यूत-सभा में पूर्ण हुआ। भविष्य पुराण में इन्द्राणी ने बलि-युद्ध से पूर्व इन्द्र की कलाई पर पवित्र सूत्र बाँधा था।
मध्ययुगीन लोक-परंपरा में पर्व को आज का भाई-बहन स्वरूप मिला। मेवाड़ की रानी कर्णावती द्वारा सम्राट हुमायूँ को राखी भेजकर सहायता-प्रार्थना की कथा सर्वविदित है।
✦ व्यापक भाव
भाई-बहन के स्वरूप के परे रक्षाबंधन का व्यापक प्रयोग है। श्रावणी पूर्णिमा पर अनेक समुदायों में उपनयन / यज्ञोपवीत भी नवीनीकृत होता है। यज्ञ में पुरोहित यजमान की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधते हैं। सूत्र — पुराने अर्थ में — दो व्यक्तियों के बीच रक्षा-संकल्प का बंधन है।
✦ सरल विधि
- 1**स्नान**, स्वच्छ वस्त्र, प्रात:काल परिवार-संगम।
- 2**राखी थाली** में राखी, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई।
- 3बहन **तिलक** करती है, **आरती** करती है, मौन प्रार्थना सहित दाहिनी कलाई पर **राखी बाँधती** है।
- 4भाई **उपहार** देता है तथा सहायता का संकल्प लेता है।
- 5**मिष्ठान्न-विनिमय**, पारिवारिक भोजन।
✦ राखी का विसर्जन
राखी पर्व-दिवस एवं कुछ दिन धारण की जाती है। जब वह टूटने लगे, धीरे से उतारकर बहती जल में प्रवाहित कर दी जाए — सामान्य कूड़े में नहीं।