ॐ नमः शिवाय — पंचाक्षरी मंत्र

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ॐ नमः शिवाय — पंचाक्षरी मंत्र

शिव का पंचाक्षरी मंत्र — न-म-शि-व-य का विश्लेषण, प्रत्येक अक्षर की तत्व-संगति, यजुर्वेद में मूल, तथा अभ्यास में प्रयोग।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

ॐ नमः शिवाय शैव परंपराओं का सर्वाधिक पाठ किया जानेवाला मंत्र। मूल — न-म-शि-व-य — पाँच अक्षर, अतः नाम पंचाक्षरी मंत्र। ॐ जोड़ने पर पूर्ण मंत्र छह अक्षरी। मूल यजुर्वेद के श्री रुद्रम् सूक्त में (कृष्ण यजुर्वेद 4.5)।

मंत्र

"ॐ नमः शिवाय"

अनुवाद: "ॐ — शिव को प्रणाम।"

नमः — "प्रणाम, नमन"। शिवाय — "शिव को", शिव का चतुर्थी विभक्ति।

पाँच अक्षर एवं पाँच तत्व

शैव व्याख्या का केंद्रीय अंश: प्रत्येक अक्षर पाँच महाभूतों, पाँच शिव-मुखों, तथा पाँच शुद्धियों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है।

अक्षरतत्वदिशागुण
पृथ्वीपश्चिमस्थिरता
जलउत्तरसंयोजन
शिअग्निदक्षिणपरिवर्तन
वायुपूर्वगति
आकाशऊर्ध्वविस्तार

न-म-शि-व-य का पाठ, इस दृष्टि में, भौतिक अस्तित्व के समस्त वर्णक्रम का परिक्रमण है तथा उसके प्रत्येक सिद्धांत के समक्ष नमन। मंत्र संसार को बायपास नहीं करता; उसे स्वीकार करता है तथा प्रत्येक स्तर पर शिव को पाता है।

श्री रुद्रम् में

पाँच अक्षर पृथक रूप से, यजुर्वेद के रुद्र-प्रश्न में निहित। प्रसिद्ध मध्य-मंत्र — "नमः शिवाय च शिवतराय च" — श्लोक को संक्षिप्त शक्ति देता है। परंपरा ने न-मः-शि-व-य को इस बड़े संदर्भ से निकालकर सबको सुलभ स्वतंत्र मंत्र बनाया, जबकि पूर्ण रुद्रम् मंदिर-पुरोहित का अनुशासन बना रहा।

अभ्यास-विधि

  1. 1**स्नान, स्वच्छ वस्त्र**, स्वच्छ आसन पर पूर्व अथवा उत्तर-मुख।
  2. 2**संकल्प** — संक्षिप्त मानसिक भाव-कथन।
  3. 3**धीमा पाठ** — रुद्राक्ष माला पर 108 आवृत्ति शास्त्रीय संख्या। नित्य अभ्यास हेतु 11, 21 अथवा 108 सब प्रचलित।
  4. 4**गति** — एक पूर्ण आवृत्ति प्रति धीमी श्वास-निःश्वास चक्र सहज गति; तीव्र गति भी प्रयुक्त। शास्त्रीय जप सामान्यतः ध्यानात्मक, उत्तेजित नहीं।
  5. 5**मौन में समाप्ति** — एक मिनट शान्त बैठें।

माला बिना

चलते समय, यात्रा में, किसी भी असहज क्षण में — मंत्र मन में मौन रूप से बिना गणना के दोहराया जा सकता है। वर्षों के अभ्यास से अनेक साधक पाते हैं कि वह स्वयं उच्चरित होने लगा है, ध्यान के प्रत्येक क्षण में उभरता हुआ। यह अजपा-जप (बिना-जप का जप) है तथा शैव परंपराओं में मंत्र-अभ्यास के उच्चतम रूपों में से एक माना जाता है।

मंत्र-वहन

पंचाक्षरी छोटा है। यही उसकी शक्ति का अंश है — इतना छोटा कि अभी-अभी पैर के अंगूठे से ठोकर लगा मन भी इसे धारण कर सकता है, फिर भी सम्पूर्ण शैव भार वहन करता है: पाँच तत्व, पाँच शिव-मुख, स्थूल से सूक्ष्म तक यात्रा, तथा यह गहरी पहचान कि यथार्थ का प्रत्येक स्तर अंततः वही शिव है। मंत्र — शास्त्रीय शैव समझ में — छह अक्षरों में संकुचित पूर्ण शिक्षण है।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ॐ कभी जोड़ा जाता है, कभी क्यों नहीं?

शुद्ध पंचाक्षरी "नमः शिवाय" — पाँच अक्षर। ॐ जोड़ने पर षडक्षरी (छह-अक्षरी) रूप। दोनों परंपरागत। दीक्षित साधक सामान्यतः वही रूप प्रयोग करते हैं जो गुरु ने दिया।

क्या शैव-परंपरा से बाहर का व्यक्ति इसका पाठ कर सकता है?

हाँ। पंचाक्षरी सर्वाधिक सार्वभौमिक रूप से सुलभ हिंदू मंत्रों में से। वैष्णव, स्मार्त, शाक्त, तथा कभी-कभी वे भी जो किसी हिंदू सम्प्रदाय से कठोर रूप से तादात्म्य नहीं रखते — पाठ करते हैं। इसकी सरलता एवं गहराई इसे व्यापक रूप से प्रयोज्य बनाती है।

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