दीवाली पूजा विधि — संपूर्ण लक्ष्मी पूजा गाइड

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त्योहार8 मिनट पठन

दीवाली पूजा विधि — संपूर्ण लक्ष्मी पूजा गाइड

चरण-दर-चरण दीवाली पूजा प्रक्रिया — लक्ष्मी-गणेश पूजा समय, मंत्र और समृद्धि के लिए अनुष्ठान।

2026-03-10

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

दीवाली, रोशनी का त्योहार, दुनिया भर में सबसे अधिक मनाया जाने वाला हिंदू त्योहार है। दीवाली की रात लक्ष्मी-गणेश पूजा का उचित प्रदर्शन पूरे वर्ष के लिए धन, समृद्धि और दैवीय आशीर्वाद लाने में विश्वास किया जाता है।

दीवाली कब है?

दीवाली कार्तिक मास की अमावस्या (अमावस्या) पर पड़ती है — आमतौर पर अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में।

दीवाली के पांच दिन

दिन 1: धनतेरस - भगवान धन्वंतरि की पूजा - सोना, चांदी, बर्तन खरीदना - घर के बाहर पहला दीया जलाना

दिन 2: छोटी दीवाली - अभ्यंग स्नान - भगवान कृष्ण की पूजा - 14 दीये जलाना

दिन 3: दीवाली / लक्ष्मी पूजा - मुख्य दिन - लक्ष्मी-गणेश पूजा - पूरे घर को दीयों से जलाना - आतिशबाजी फोड़ना - मिठाइयां और उपहारों का आदान-प्रदान

दिन 4: गोवर्धन पूजा - भगवान कृष्ण की पूजा - अन्नकूट - गायों की पूजा

दिन 5: भाई दूज - बहन-भाई बंधन का उत्सव - बहन भाई को तिलक लगाती है - भाई उपहार देता है

पूजा विधि

चरण 1: शुद्धिकरण - हर जगह गंगा जल छिड़कें - अनुष्ठानिक स्नान करें - नए स्वच्छ कपड़े पहनें

चरण 2: संकल्प - पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें - एक दीया जलाएं - पूजा के लिए संकल्प लें

चरण 3: गणेश पूजा - गणेश मूर्ति को लाल कपड़े पर रखें - पानी (आचमन) चढ़ाएं - अक्षत के साथ तिलक लगाएं - फूल, मोदक, दूर्वा चढ़ाएं

चरण 4: कलश पूजा - आम के पत्तों के साथ कलश स्थापित करें - ऊपर नारियल रखें - देवी लक्ष्मी के रूप में पूजा करें

चरण 5: लक्ष्मी पूजा - लक्ष्मी मूर्ति को कमल पर रखें - मूर्ति को दूध, दही, घी, शहद, चीनी (पंचामृत) से स्नान कराएं - स्वच्छ जल से धोएं - चंदन, कुमकुम लगाएं - लाल फूल चढ़ाएं - देवी के लिए नए वस्त्र रखें

निष्कर्ष

दीवाली लक्ष्मी पूजा, जब भक्ति और उचित प्रक्रिया के साथ की जाती है, माना जाता है कि देवी लक्ष्मी को आपके घर में स्थायी रूप से निवास करने के लिए आमंत्रित करती है। आपकी दीवाली प्रकाश, समृद्धि और दैवीय आशीर्वाद से भरी हो!

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मैं अकेले लक्ष्मी पूजा कर सकता हूं?

हाँ, लेकिन पारिवारिक पूजा अधिक शुभ है। अकेले भी, पूरी भक्ति के साथ करें।

लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?

अमावस्या को प्रदोष काल (सूर्यास्त के 2.5 घंटे बाद) सबसे शुभ है।

क्या मुझे पूरी रात दीये जलाने चाहिए?

हाँ, आदर्श रूप से रात भर अखंड ज्योति लक्ष्मी का आशीर्वाद आमंत्रित करती है।

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॥ ॐ शुभं भवतु ॥