बृहस्पतिवार व्रत — गुरु हेतु गुरुवार उपवास

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त्योहार5 मिनट पठन

बृहस्पतिवार व्रत — गुरु हेतु गुरुवार उपवास

बृहस्पति (गुरु) — विद्या, श्रद्धा एवं धार्मिक शिक्षण के ग्रह — को समर्पित गुरुवार व्रत। पीत-वर्ण आधारित सरल विधि, चना-दाल-हल्दी प्रसाद, तथा दिवस का संवर्धन।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

गुरुवार — बृहस्पति (गुरु ग्रह), देवों के गुरु, विद्या-श्रद्धा-नीति-धर्म-शिक्षक-उच्चशिक्षा के ग्रह — से नामांकित। गुरुवार व्रत विद्यार्थी, परीक्षार्थी, संतान-कामी, तथा जीवन में स्पष्ट नैतिक दिशा चाहनेवालों द्वारा व्यापक रूप से पालित।

गुरुवार को बृहस्पति क्यों?

शास्त्रीय वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ज्ञान, पुत्र, धर्म एवं गुरु के नैसर्गिक कारक हैं। उनका साप्ताहिक दिवस इन्हीं विषयों के स्मरण एवं संवर्धन को समर्पित।

दैनिक विधि

  1. 1**प्रात:स्नान**, **पीले वस्त्र** — पीला बृहस्पति का रंग।
  2. 2**पूजा** — गृह-मंदिर अथवा विष्णु / बृहस्पति-मंदिर में। परंपरागत अर्पण: पीले पुष्प, चना दाल एवं गुड़, पीपल पत्र, हल्दी — केले के पौधे को तिलक रूप में लगाया जाता है क्योंकि केला बृहस्पति को प्रिय है।
  3. 3**मंत्र** — बृहस्पति बीज मंत्र "ॐ ब्रिं बृहस्पतये नमः" (108 आवृत्ति) अथवा बृहस्पति गायत्री।
  4. 4**लघु उपवास** — संध्या एक शाकाहारी भोजन, चना दाल एवं पीले चावल सहित। कठोर पालन में नमक त्याग।
  5. 5**पाठ** — बृहस्पति व्रत कथा (हिंदी लोक-कथा) का पाठ अथवा श्रवण।
  6. 6**दान** — पीली वस्तुएँ, विद्यार्थी को पुस्तक, शिक्षा हेतु दान, संकटग्रस्त शिक्षक की सहायता। गुरुवार का शिक्षा-दान सर्वाधिक उपयुक्त।

वर्जित

केला — बृहस्पति से सम्बद्ध फल — व्रत-पालक गुरुवार को नहीं खाते (अर्पित किया जाता है, खाया नहीं)। केश एवं नख-कर्तन भी गुरुवार को परंपरागत रूप से वर्जित (यह व्यापक नियम है, केवल व्रती हेतु नहीं)।

व्रत का संवर्धन

विशिष्ट प्रार्थना के परे, व्रत का हृदय है साप्ताहिक रूप से धर्म की ओर मोड़। कुछ घंटे गंभीर पठन, गुरु-स्मरण, विद्यार्थी-सहायता, अपनी नैतिक रेखा के सुदृढ़ीकरण को। बृहस्पति-कृपा शास्त्रीय दृष्टि में उन्हीं की ओर बहती है जो पहले से इस दिशा में झुके हैं।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरुवार को केले के पौधे की पूजा क्यों?

शास्त्रीय प्रतिमा-विज्ञान में केले का पौधा बृहस्पति से सम्बद्ध है — दोनों लम्बे, पीत-वर्ण एवं स्वभाव से शुभ हैं। पौधे की पूजा घर में बृहस्पति की उपस्थिति का सजीव प्रतीक मानी जाती है।

क्या मैं अपने बच्चों की सफलता हेतु यह व्रत रख सकता हूँ?

हाँ — यह इसके पालन के शास्त्रीय कारणों में से है। बृहस्पति बच्चों के कल्याण एवं शिक्षा के कारक हैं, तथा संतान हेतु पैतृक व्रत परंपरा में सुप्रतिष्ठित हैं।

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