अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (ग्रेगोरियन में प्रायः सितम्बर) पर। यह अनंत — विष्णु के अनंत, सर्वव्यापी रूप — का पर्व है, जिन्हें प्रायः सृष्टि-चक्रों के बीच शयन-स्थित विष्णु के नीचे शेष-नाग के रूप में चित्रित किया जाता है। भारत के अनेक भागों में यही गणेशोत्सव का विसर्जन-दिवस भी है, गणेश चतुर्थी के दस दिन बाद।
✦ अनंत सूत्र
अनंत चतुर्दशी का मूल अनुष्ठान है अनंत सूत्र — चौदह गाँठों वाला, हल्दी-रंजित पवित्र सूत्र, पुरुषों की दाहिनी एवं स्त्रियों की बाईं कलाई पर बाँधा जाता है। चौदह गाँठें चौदह लोकों — विष्णु की देखरेख विस्तार करनेवाले — का प्रतीक हैं, अथवा महाभारत में वर्णित मूल व्रत-कथा के चौदह वर्षों की।
✦ महाभारत-सम्बन्ध
महाभारत के आरण्यक पर्व में कृष्ण ने वनवास-काल में युधिष्ठिर को अनंत व्रत बताया। द्यूत-सभा में राज्य-हानि के पश्चात् युधिष्ठिर ने पूछा कि पाण्डव अपनी सम्पत्ति कैसे पुनः प्राप्त करें। कृष्ण ने सुमंत-सुशीला (ब्राह्मण-दम्पत्ति) की कथा कही — कैसे सुशीला के चौदह वर्षों के व्रत-पालन ने उन्हें स्थायी समृद्धि दी।
✦ सरल विधि
- 1**स्नान**, स्वच्छ वस्त्र (पीला — विष्णु का रंग)।
- 2**पूजा-वेदी** — विष्णु-छवि, जल-कलश, स्वच्छ वस्त्र पर हल्दी अथवा चावल के आटे से लघु मण्डल।
- 3**अनंत सूत्र निर्माण** — चौदह-गाँठ का सूती अथवा रेशमी सूत्र, हल्दी-जल में रात्रि-भर भिगोया हुआ।
- 4**संकल्प** — व्रत का संक्षिप्त मानसिक कथन।
- 5**पूजा** — पुष्प, फल, मिष्ठान्न, धूप, दीप विष्णु को अर्पित।
- 6**सूत्र-बंधन** — पालक तैयार सूत्र को कलाई पर (पुरुष दाहिनी, स्त्री बाईं) "ॐ अनन्ताय नमः" के उच्चारण सहित बाँधता है।
- 7**कथा-पाठ** — अनंत व्रत कथा का पाठ।
- 8**संध्या एक सात्विक भोजन**।
✦ सूत्र-धारण
सूत्र वर्ष-भर — अगली अनंत चतुर्दशी तक — धारण किया जाता है। तब पुराना सूत्र (कोमलता से, बिना तोड़े) उतारकर बहती जल में प्रवाहित कर दिया जाता है तथा नया बाँधा जाता है। कुछ समुदायों में चौदह क्रमिक वर्षों तक धारण के पश्चात् अंतिम समापन-अनुष्ठान।
✦ समय-सूत्र
जो परिवार गणेशोत्सव भी पाल रहा हो, प्रात: अनंत-पूजा एवं अपराह्न गणेश-विसर्जन-यात्रा। दोनों पर्वों का इस दिन संयोग महाराष्ट्र एवं दक्षिण भारत के कुछ भागों में हिंदू कैलेंडर की प्रसिद्ध विशेषता है।