✦ निषेक मुहूर्त 2026 ✦
✦ विवाह-पश्चात् चतुर्थ-रात्रि — दम्पति-मिलन का शास्त्रोक्त-मुहूर्त ✦
✦ शुभ मुहूर्त 2026 ✦
विवाह-पश्चात् चतुर्थ-रात्रि — दम्पति-मिलन का शास्त्रोक्त-मुहूर्त
पारम्परिक-रात्रि
4थी पश्चात्
श्रेष्ठ-तिथि
युग्म-तिथि
चन्द्र-बल
अनिवार्य
✦ शास्त्रोक्त-नियम ✦
- 1
विवाह-पश्चात् 4थी-रात्रि-पश्चात् ही दाम्पत्य-समागम — शास्त्र-नियम।
- 2
युग्म-तिथि (2, 4, 6, 10, 12) श्रेष्ठ। 1, 14, अमावस्या, पूर्णिमा वर्ज्य।
- 3
नक्षत्र शुभ: मृगशिरा, रोहिणी, अनुराधा, हस्त, स्वाति, पुष्य।
- 4
सोम/बुध/गुरु/शुक्र-वार। चन्द्र-बल अनिवार्य।
निषेक-मुहूर्त विवाह-तिथि पर निर्भर — विवाह के 4-16 दिन में उपर्युक्त नक्षत्र/तिथि/वार वाला रात्रि चुनें। शास्त्र-अनुसार युग्म-रात्रि (पुत्र-कामना) श्रेष्ठ। यह "गर्भाधान-संस्कार" का प्रथम-चरण है।
✦ प्रश्न-उत्तर ✦
Q. क्या आधुनिक-काल में 4-रात्रि-नियम पालन?
पारम्परिक-परिवारों में हाँ। आधुनिक-काल में लोग व्यक्तिगत-निर्णय करते हैं। शास्त्र-अनुसार — आत्म-संयम एवं शुद्ध-संकल्प हेतु 4-रात्रि-प्रतीक्षा।
Q. क्या गर्भाधान-संस्कार और निषेक एक हैं?
सम्बन्धित। निषेक = प्रथम-समागम। गर्भाधान = सन्तानोत्पत्ति-संकल्प सहित-समागम। पारम्परिक-परिवारों में निषेक के समय ही गर्भाधान-संकल्प।