जातकर्म मुहूर्त 2026

जातकर्म मुहूर्त 2026

16 संस्कारों में चतुर्थ — जन्म-पश्चात् तुरन्त किया जाने वाला संस्कार

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शुभ मुहूर्त 2026

16 संस्कारों में चतुर्थ — जन्म-पश्चात् तुरन्त किया जाने वाला संस्कार

पारम्परिक-समय

जन्म-तत्क्षण

मुहूर्त-नियम

अपेक्षित नहीं

अनिवार्य-दर्ज

जन्म-नक्षत्र

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शास्त्रोक्त-नियम

  1. 1

    जन्म-के तुरन्त-पश्चात् (नाल-काटने से पूर्व) — कोई-विशिष्ट-मुहूर्त नहीं।

  2. 2

    पिता शिशु को स्वर्ण-शलाका से मधु एवं घृत-मिश्रित-तत्व चटाता है (मेधा-जनन-हेतु)।

  3. 3

    वेद-मन्त्र — "त्वं वेदोऽसि, त्वं मेधा अस्ति" — कानों में 3 बार।

  4. 4

    जन्म-नक्षत्र-नोट करें (बाद के संस्कारों एवं नामकरण-हेतु)।

जातकर्म-संस्कार जन्म-समय पर तुरन्त किया जाता है — स्वतन्त्र-मुहूर्त नहीं चाहिए। आधुनिक-काल में अधिकांश-परिवारों में नामकरण के समय इसे संयुक्त-किया जाता है।

प्रश्न-उत्तर

Q. क्या आधुनिक-अस्पताल में संभव?

हाँ — पिता प्रसूति-गृह-पश्चात् शिशु के कान में मन्त्र-जप कर सकता है, स्वच्छ-स्वर्ण-शलाका/चम्मच से मधु-घृत चटा सकता है। संक्षिप्त-रूप।

Q. क्या रात्रि-जन्म पर भी?

हाँ — रात्रि-जन्म पर भी तुरन्त। दिन-निरपेक्ष — जन्म-तत्क्षण होने वाला संस्कार।