✦ गर्भाधान मुहूर्त 2026 ✦
✦ 16 संस्कारों में प्रथम — सन्तानोत्पत्ति-संकल्प की पवित्र-रात्रि ✦
✦ शुभ मुहूर्त 2026 ✦
16 संस्कारों में प्रथम — सन्तानोत्पत्ति-संकल्प की पवित्र-रात्रि
पारम्परिक-काल
4–16 नक्षत्र-रात्रियाँ
शुभ-वार
सोम/बुध/गुरु/शुक्र
नक्षत्र-संख्या
7
✦ शास्त्रोक्त-नियम ✦
- 1
पारम्परिक: मासिक-धर्म-पश्चात् 4थी से 16वीं रात्रि (युग्म-रात्रियाँ श्रेष्ठ — पुत्र-संतति-कामना हेतु)।
- 2
दिन: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार। मंगल/शनि/रवि वर्ज्य।
- 3
नक्षत्र शुभ: मृगशिरा, रोहिणी, अनुराधा, स्वाति, पुष्य, हस्त, श्रवण। तीक्ष्ण-नक्षत्र वर्जित।
- 4
तिथि वर्ज्य: 1, 4, 6, 8, 9, 14 (रिक्ता, अष्टमी, चतुर्दशी)।
गर्भाधान-मुहूर्त व्यक्तिगत-चक्र (मासिक-धर्म-दिनांक) पर निर्भर — वर्ष-विशेष-तिथियाँ नहीं। उपर्युक्त नियम-अनुसार अपने पंचांग में देखें। प्रत्येक-मास के शुक्ल-पक्ष में 7-10 शुभ-रात्रियाँ मिलती हैं।
✦ प्रश्न-उत्तर ✦
Q. क्या प्रत्येक-दम्पति को गर्भाधान-संस्कार करना आवश्यक?
शास्त्र-अनुसार — हाँ। 16 संस्कारों में प्रथम। आधुनिक-काल में संक्षिप्त-रूप में किया जाता है — दीप-प्रज्वलन, मन्त्र-जप, संकल्प।
Q. युग्म/अयुग्म रात्रि का क्या अर्थ?
युग्म-रात्रि (4, 6, 8, 10, 12, 16) — पुत्र-संतति-कामना। अयुग्म (5, 7, 9, 11, 15) — पुत्री-कामना। केवल-शास्त्रोक्त, आधुनिक-विज्ञान-असम्मत।