सोमवार व्रत — शिव-आराधना का साप्ताहिक व्रत

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सोमवार व्रत — शिव-आराधना का साप्ताहिक व्रत

शिव-समर्पित पारंपरिक सोमवार व्रत — इसके तीन शास्त्रीय रूप (सामान्य सोमवार, सोलह सोमवार, श्रावण सोमवार), सरल विधि, आहार-नियम तथा मन से अपेक्षित भाव।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

सोमवार — सोम (चंद्र) से नामांकित, हिंदू परंपरा में शिव-समर्पित (जिनके मस्तक पर चंद्र-कला विराजमान है)। सोमवार व्रत साप्ताहिक व्रतों में सर्वाधिक प्रचलित है, तीन प्रमुख रूपों में पालित।

तीन रूप

1. सामान्य सोमवार व्रत किसी भी सोमवार को एक-दिवसीय व्रत। सूर्योदय से संध्या तक उपवास; शिव-आरती से पारणा एवं एक सात्विक भोजन। बच्चे, वृद्ध, अस्वस्थ — सभी संशोधित रूप (फल-दूध दिनभर, एक भोजन) में रख सकते हैं।

2. सोलह सोमवार व्रत सोलह क्रमिक सोमवार। प्रायः श्रावण अथवा आषाढ़ शुक्ल पक्ष में आरंभ, अंत में सोलह वस्तुओं (सोलह दीप, सोलह पुष्प आदि) के अर्पण सहित संक्षिप्त उद्यापन। परंपरागत रूप से अविवाहित स्त्रियों द्वारा सुयोग्य जीवन-साथी हेतु, परंतु निरंतर अनुशासन-साधक कोई भी रख सकता है।

3. श्रावण सोमवार श्रावण मास के चार (कभी-कभी पाँच) सोमवारों का विशेष व्रत। श्रावण शिव-मास है तथा अनुशासन गंभीरता से पालित — एक के बाद एक सोमवार, विस्तृत शिव-मंदिर गमन सहित।

दैनिक विधि

  1. 1**प्रात:पूर्व स्नान**, स्वच्छ वस्त्र (श्वेत अथवा गेरुआ)।
  2. 2**संकल्प** — संक्षिप्त मानसिक कथन: "इस सोमवार मैं परिवार के कल्याण एवं शिव-भाव की गहराई हेतु यह व्रत स्वीकार करता हूँ।"
  3. 3**शिव-पूजा** — गृह-मंदिर अथवा शिवालय में लिंग पर अभिषेक; जल, दूध, मधु; बिल्व पत्र, श्वेत पुष्प, धूप, दीप।
  4. 4**मंत्र-जप** — ॐ नमः शिवाय (108 आवृत्ति)। महामृत्युंजय जो अभ्यस्त हों।
  5. 5**दिनभर उपवास** — जल, दूध, फल, सबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा अनुमत। अनाज, नमक, लहसुन-प्याज वर्जित।
  6. 6**संध्या-आरती**, सात्विक भोजन से पारणा।

व्रत का अंतर्भाव

आहार-नियम महत्वपूर्ण हैं — परंतु गहरा नियम है वाक्-तप: एक दिन का वाणी-संयम। कटु वचन, परनिंदा एवं तीखी वार्ता व्रत के भाव को नष्ट करती हैं चाहे उपवास तकनीकी रूप से पालित हो। सोमवार व्रत — शास्त्रीय रूप से — अल्पकालिक तपस्या का अभ्यास है: यह पूछने का कि वस्तुतः क्या चाहिए तथा किसके बिना संभव है।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मधुमेह-रोगी अथवा औषधि-सेवी यह व्रत रख सकते हैं?

हाँ — संशोधित रूप में। औषधि नियमित रूप से लें, रक्त-शर्करा बनाए रखने हेतु दिनभर फल-दूध, केवल मुख्य अनाज-भोजन त्यागें। शास्त्रीय सिद्धांत है कि व्रत शरीर को कभी हानि न पहुँचाए।

क्या मंदिर जाना आवश्यक है या घर में भी कर सकते हैं?

दोनों मान्य हैं। कामकाजी गृहस्थों के लिए शताब्दियों से गृह-पूजा सामान्य रही है। एक लघु लिंग, स्वच्छ वस्त्र, जल, बिल्व पत्र, दीप पर्याप्त।

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