शनिवार — शनि (शनि ग्रह) से नामांकित। शनि शास्त्रीय सात ग्रहों में मन्द-गामी, अनुशासन के स्वामी, कर्म की धीमी परिपक्वता एवं कष्ट-दाता जो सरल परिस्थितियाँ नहीं सिखा पातीं उसका शिक्षक। शनिवार व्रत — विशेषतः साढ़े-साती अथवा ढैय्या (जन्म-राशि पर एवं उससे लगे शनि के 7.5 / 2.5 वर्ष के गोचर) से गुज़रनेवालों द्वारा — भारत में सर्वाधिक पालित साप्ताहिक व्रतों में से।
✦ शनि-व्रत का प्रयोजन
स्वीकार — शनि न्याय के कारक हैं। साप्ताहिक स्मरण-दिवस यह स्वीकार है कि जीवन पूर्व-कर्मों से रूपांकित है तथा वर्तमान अनुशासन महत्वपूर्ण है।
धैर्य का संवर्धन — शनि के स्वामित्व के गुण (धैर्य, परिश्रम, तपस्या, सेवा) ठीक वही हैं जो व्रत माँगता है। दिन छोटा प्रशिक्षण-स्थल है।
✦ दैनिक विधि
- 1**प्रात:स्नान**। काले अथवा गहरे नीले वस्त्र शनिवार के परंपरागत रंग।
- 2**शनि-मंदिर दर्शन** — संक्षिप्त भी हो तो शनि-मंदिर अथवा शनि-मूर्ति का दर्शन। परंपरागत अर्पण: सरसों तेल मूर्ति पर अर्पित; काले तिल; उड़द दाल; लोहे की वस्तु; पीपल पत्र।
- 3**मंत्र-जप** — शनि गायत्री अथवा सरल "ॐ शं शनैश्चराय नमः"। 11, 28 अथवा 108 आवृत्ति।
- 4**दान** — शनिवार दान का प्रबल दिवस। निर्धन अथवा वृद्ध को काले तिल, उड़द, लौह उपकरण, सरसों तेल, पादुका अथवा गर्म वस्त्र — ये शनि-शांति से सम्बद्ध हैं।
- 5**लघु उपवास** — संध्या एक भोजन, बिना लहसुन-प्याज। उड़द दाल की खिचड़ी परंपरागत शनिवार-भोजन।
- 6**सेवा-कार्य** — माता-पिता, वृद्ध अथवा निर्धन की सेवा शनिवार का सर्वाधिक प्रबल आचार। शनि का ग्रह-स्वभाव सेवा है।
✦ वर्जित
शनिवार को लोह, पादुका अथवा तेल का क्रय परंपरागत रूप से वर्जित (ये शनि के हैं; उनके दिवस पर उनकी वस्तुएँ घर नहीं लाई जातीं)। नवारंभ एवं बड़े क्रय स्थगित। तीखी वाणी विशेष रूप से सावधान — शनिवार का असावधान शब्द देर से भुलाया जाता है।
✦ भय पर सूत्र
अनेक शनिवार-पालक भय से दिवस को देखते हैं। शास्त्रीय साहित्य शनि को कठोर शिक्षक मानता है — लोक-अर्थ में पीड़क नहीं। व्रत आदर सहित — डर सहित नहीं — पाला जाए तो अधिक फलदायी, तथा यह स्वीकार सहित कि अपनी कठिनाइयाँ अपने ही चुनावों से उत्पन्न हुई हैं।