नवग्रह शान्ति: कुण्डली के 9 ग्रहों की पूजा

🪐
ज्योतिष8 मिनट पठन

नवग्रह शान्ति: कुण्डली के 9 ग्रहों की पूजा

संपूर्ण नवग्रह-शान्ति-पूजा — कौन-सा ग्रह क्या-समस्या, व्यक्तिगत-उपाय, रत्न, और दैनिक 9-ग्रह-प्रोटोकॉल।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

नवग्रह वैदिक-ज्योतिष में मानव-जीवन को प्रभावित करने वाले 9 आकाशीय-पिण्ड — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु। कोई ग्रह नीच, पीड़ित, या बुरी-दशा में हो तो जीवन में बाधाएँ। नवग्रह-शान्ति-पूजा सब 9 को सन्तुष्ट कर सन्तुलन।

9 ग्रह-अवलोकन

#ग्रहसंस्कृतदिनरंगदिशाधातुअनाज
1सूर्यसूर्यरविलालपूर्वतांबागेहूँ
2चन्द्रचन्द्रसोमसफेदवायव्यचाँदीचावल
3मंगलमंगलमंगललालदक्षिणतांबाअरहर
4बुधबुधबुधहराउत्तरकांसामूँग
5गुरुबृहस्पतिगुरुपीलाईशानस्वर्णचना
6शुक्रशुक्रशुक्रसफेदआग्नेयचाँदीसफेद-चावल
7शनिशनिशनिकालापश्चिमलोहाकाले-तिल
8राहुधूम्र-धूसरनैऋत्यसीसाकाला-उड़द
9केतुबहु-रंगकुलथी

ग्रह-अनुसार लक्षण

सूर्य-पीड़ित - पिता-समस्या - अधिकार-समस्या - नेत्र/हृदय - सरकारी-समस्या - आत्म-विश्वास-कमी

चन्द्र-पीड़ित - माता-समस्या - मानसिक-अशान्ति - अनिद्रा - भावनात्मक-अस्थिरता - जल-जनित-रोग

मंगल-पीड़ित - क्रोध, दुर्घटना - रक्त-विकार - विवाह-विलम्ब (मंगल-दोष) - सर्जरी-आवश्यकता - सम्पत्ति-विवाद

बुध-पीड़ित - वाक्-समस्या - स्मृति-समस्या - त्वचा-रोग - शिक्षा-बाधा - सम्प्रेषण-गलतफहमी

गुरु-पीड़ित - ज्ञान-कमी - सन्तान-समस्या - यकृत/मधुमेह - आध्यात्मिक-अवरोध - धन-बाधा

शुक्र-पीड़ित - विवाह-समस्या - सौन्दर्य/त्वचा - वाहन-दुर्घटना - विलासिता-कमी - प्रजनन-समस्या

शनि-पीड़ित - चिर-विलम्ब - दीर्घ-रोग - करियर-ठहराव - जोड़ों के दर्द - अकेलापन, अवसाद

राहु-पीड़ित - भ्रम, चिन्ता - विदेशी-समस्या - अचानक-हानि - त्वचा-एलर्जी - व्यसन-प्रवृत्ति

केतु-पीड़ित - आध्यात्मिक-भ्रम - रहस्यमय-बीमारी - वैराग्य-समस्या - पूर्व-जन्म-कर्म-उभार

व्यक्तिगत-उपाय (प्रति-ग्रह)

सूर्य - **मन्त्र**: `ॐ सूर्याय नमः` × 7,000 - **दिन**: रविवार-प्रातः - **दान**: गेहूँ, गुड़, तांबा - **रत्न**: माणिक — मात्र ज्योतिषी-अनुमति-पश्चात - **पूजा**: आदित्य-हृदय-स्तोत्र

चन्द्र - **मन्त्र**: `ॐ सोमाय नमः` × 11,000 - **दिन**: सोमवार - **दान**: सफेद-चावल, दूध, चाँदी - **रत्न**: मोती - **पूजा**: चन्द्र-स्तोत्र

मंगल - **मन्त्र**: `ॐ भौमाय नमः` × 7,000 - **दिन**: मंगलवार - **दान**: अरहर, लाल-वस्त्र, तांबा - **रत्न**: मूँगा - **पूजा**: हनुमान-चालीसा, सुन्दरकाण्ड

बुध - **मन्त्र**: `ॐ बुधाय नमः` × 9,000 - **दिन**: बुधवार - **दान**: मूँग, हरा-वस्त्र - **रत्न**: पन्ना - **पूजा**: विष्णु-सहस्रनाम

गुरु - **मन्त्र**: `ॐ बृहस्पतये नमः` × 19,000 - **दिन**: गुरुवार - **दान**: चना, पीला-वस्त्र, स्वर्ण - **रत्न**: पुखराज - **पूजा**: विष्णु/बृहस्पति-स्तोत्र

शुक्र - **मन्त्र**: `ॐ शुक्राय नमः` × 16,000 - **दिन**: शुक्रवार - **दान**: सफेद-चावल, सफेद-वस्त्र, चाँदी - **रत्न**: हीरा या सफेद-नीलम - **पूजा**: लक्ष्मी-सहस्रनाम

शनि - **मन्त्र**: `ॐ शनये नमः` × 23,000 - **दिन**: शनिवार - **दान**: काले-तिल, सरसों-तेल, लोहा - **रत्न**: नीलम — सर्वाधिक-सावधानी - **पूजा**: शनि-स्तोत्र, हनुमान-चालीसा

राहु - **मन्त्र**: `ॐ राहवे नमः` × 18,000 - **दिन**: शनिवार - **दान**: काला-उड़द, कम्बल, सरसों-तेल - **रत्न**: गोमेद - **पूजा**: दुर्गा-सप्तशती

केतु - **मन्त्र**: `ॐ केतवे नमः` × 17,000 - **दिन**: मंगलवार - **दान**: कुलथी, कम्बल, तिल-तेल - **रत्न**: लहसुनिया (Cat's eye) - **पूजा**: गणेश, भैरव

दैनिक 9-ग्रह-मन्त्र (संक्षिप्त)

``` ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु शशी भूमिसुतो बुधश्च गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु ```

दैनिक 108 बार — एक-पाठ सब 9 का सम्मान।

संपूर्ण नवग्रह-शान्ति-पूजा-विधि

श्रेष्ठ-दिन - शनिवार (शनि-दिन, सब-ग्रह-दिन) - या आपका सर्वाधिक-पीड़ित-ग्रह-दिन

व्यवस्था - 9 छोटे अनाज-ढेर (प्रत्येक ग्रह का अनाज) - 9 दीये (या 1 में 9 बत्तियाँ) - सब 9 ग्रहों का चित्र (नवग्रह-मण्डल) - 9 छोटे-पुष्प - पंचामृत - काले-तिल, सफेद-तिल, नमक

क्रम 1. गणेश-पूजा (5 मिनट) 2. संकल्प 3. एक-एक करके 9 ग्रह-आवाहन 4. प्रत्येक-ग्रह के ढेर में सम्बन्धित-अनाज 5. 9 दीप-प्रज्ज्वलन 6. प्रत्येक के 11 व्यक्तिगत-मन्त्र 7. संक्षिप्त-मन्त्र × 108 8. आरती (ॐ जय जगदीश — सार्वभौमिक) 9. अनाज मन्दिर में

नवग्रह-पूजा कब

विशेष-संकेत - कठिन-ग्रह की महादशा-शुरू - कुण्डली-विश्लेषण-पीड़न - प्रमुख-जीवन-घटना (विवाह, करियर-परिवर्तन, सर्जरी) - वार्षिक-रखरखाव (प्रत्येक शनिवार) - महत्वपूर्ण-आघात-पश्चात

प्रसिद्ध-मन्दिर - **सूर्यनारकोइल** (तमिलनाडु) — 80 किमी में 9 अलग-मन्दिर - **त्र्यम्बकेश्वर** (महाराष्ट्र) - **भैरव-मन्दिर** राहु/केतु हेतु

रत्न-सावधानी

⚠️ उचित ज्योतिषीय-परामर्श बिना रत्न कभी न पहनें। गलत-रत्न बुरे-प्रभाव बढ़ाता।

सुरक्षित-अनुशंसा - 5 मुखी रुद्राक्ष (सार्वभौमिक) - कुण्डली-विश्लेषण हेतु प्रमाणित-ज्योतिषी - प्राण-प्रतिष्ठा से पहले रत्न 1 सप्ताह परीक्षण - ग्रह-अनुसार स्वर्ण/चाँदी-सेटिंग

सामान्य-गलतियाँ

  1. 1**यादृच्छिक-रत्न-धारण** — विश्लेषण बिना
  2. 2**"भय" से शनिवार छोड़ना** — शनि निरन्तरता-पुरस्कार
  3. 3**राहु और केतु-रत्न साथ** — विरोधी-ऊर्जा
  4. 4**यान्त्रिक-मन्त्र-जप** — भाव पर ध्यान
  5. 5**स्वार्थी-दान** — उद्देश्य-विफल
  6. 6**शनि-उपेक्षा ("शनि बुरा")** — शनि गुरु, शत्रु नहीं

निष्कर्ष

नवग्रह-शान्ति "क्रोधित-ग्रहों" का सन्तुष्टीकरण नहीं — ब्रह्माण्डीय-लय से सामंजस्य। ग्रह कर्म-पैटर्न प्रतिबिम्बित; उपाय आपका संरेखण समायोजित। श्रद्धा और ज्ञान के साथ, मापनीय जीवन-सुधार। सर्वे भवन्तु सुखिनः!

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवग्रह-पूजा करूँ या व्यक्तिगत-ग्रह ठीक करूँ?

दोनों। सामान्य-सामंजस्य हेतु वार्षिक नवग्रह-पूजा, और कुण्डली-अनुसार सर्वाधिक-पीड़ित-ग्रह की साप्ताहिक-पूजा। उदाहरण: शनि-पीड़ित? साप्ताहिक शनि-पूजा + वार्षिक नवग्रह। यह संयोग सर्वाधिक-प्रभावी।

मेरी कुण्डली में कौन-सा ग्रह पीड़ित कैसे जानूँ?

मुफ्त ऑनलाइन कुण्डली-जनरेटर (AstroSage, Drik Panchang) ग्रह-स्थिति और मूल-दोष दिखाते। सटीक-विश्लेषण हेतु प्रमाणित वैदिक-ज्योतिषी (₹500-3000)। सटीक जन्म-समय + स्थान — सटीकता इस पर निर्भर।

क्या रुद्राक्ष रत्न का स्थान ले सकता?

अधिकांश मामलों में, हाँ — और सुरक्षित। रुद्राक्ष का कोई नकारात्मक दुष्प्रभाव नहीं, जबकि गलत-रत्न उल्टा हो सकता। सामान्य के लिए 5 मुखी; विशेष-ग्रहों के लिए विशेष-मुखी (शनि के लिए 7, राहु के लिए 8)। समर्पित-ज्योतिषी न होने पर श्रेष्ठ।

संबंधित लेख

॥ ॐ शुभं भवतु ॥