मंगलवार — मंगल (मंगल ग्रह) से नामांकित। हिंदू परंपरा में यह दिन हनुमान — शक्ति, साहस एवं अविचल सेवा के भक्त-देवता — को समर्पित है। मंगलवार व्रत भारत के अधिकांश भागों में गृह-प्रथा है।
✦ मंगलवार को हनुमान क्यों?
मंगल ऊर्जा, साहस एवं वीर गुणों का ग्रह है। पवन-पुत्र हनुमान इन गुणों के उच्चतम रूप — अति-मानवीय शक्ति बनी भक्ति — के मूर्तरूप हैं। शास्त्रीय संबंध सीधा है: ऊर्जा का दिवस ऊर्जा-देवता को समर्पित।
व्रत विशेष रूप से अनुशंसित — जिनके जन्म-कुंडली में मंगल दोष हो, न्यायालय अथवा सम्पत्ति-विवाद, रक्त-पेशी सम्बंधी स्वास्थ्य-चिंता, भय-व्याकुलता काल में साहस-संवर्धन हेतु।
✦ सरल विधि
- 1**प्रात:स्नान**, स्वच्छ वस्त्र (लाल अथवा गेरुआ — मंगलवार का परंपरागत रंग)।
- 2**हनुमान पूजा** — गृह-मंदिर अथवा हनुमानालय में। शास्त्रीय अर्पण: सिंदूर (सरसों तेल मिश्रित, मूर्ति पर लेपित), लाल पुष्प (गेंदा, गुड़हल), बूंदी-लड्डू अथवा गुड़-चना प्रसाद।
- 3**पाठ** — हनुमान चालीसा (40 दोहे) सार्वत्रिक। दीर्घ-पाठ अभ्यासी सुंदरकांड (रामायण का पंचम काण्ड) मंगलवार को पढ़ते हैं।
- 4**लघु उपवास** — मध्याह्न अथवा संध्या एक भोजन, नमक-तेल-लहसुन-प्याज वर्जित। कुछ केवल फल-दूध।
- 5**दान** — वानरों को चना खिलाना, मिठाई एवं लाल वस्त्र दान।
✦ अंतर्भाव
हनुमान का गुण है निरहंकार सेवा। मंगलवार व्रत अनुष्ठान के परे एक अवसर है — किसी अदृश्य सेवा-कार्य का। पड़ोसी की मूक सहायता, घर का एक कार्य जो प्रायः कोई और करता है, एक दिन की किसी सुख-वस्तु का त्याग। हनुमान-कृपा सेवा करनेवालों की ओर बहती है, केवल माँगनेवालों की ओर नहीं।
✦ सावधानी
व्रत को रोग अथवा कानूनी संकट का गारंटीशुदा निदान न मानें। व्रत भक्ति-अनुशासन है; वह चिकित्सक-अधिवक्ता के स्थान पर नहीं, उनके साथ है। नियमित साप्ताहिक लय से मास-दर-मास मनोदशा एवं संकल्प में मापनीय परिवर्तन आता है — यही व्यावहारिक दावा है।