मंगलवार व्रत — हनुमान-समर्पित मंगलवार उपवास

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मंगलवार व्रत — हनुमान-समर्पित मंगलवार उपवास

हनुमान-समर्पित मंगलवार व्रत — मंगल ग्रह से सम्बंध, सरल विधि, सुंदरकांड अथवा हनुमान चालीसा का पाठ तथा परंपरागत लाभ।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

मंगलवार — मंगल (मंगल ग्रह) से नामांकित। हिंदू परंपरा में यह दिन हनुमान — शक्ति, साहस एवं अविचल सेवा के भक्त-देवता — को समर्पित है। मंगलवार व्रत भारत के अधिकांश भागों में गृह-प्रथा है।

मंगलवार को हनुमान क्यों?

मंगल ऊर्जा, साहस एवं वीर गुणों का ग्रह है। पवन-पुत्र हनुमान इन गुणों के उच्चतम रूप — अति-मानवीय शक्ति बनी भक्ति — के मूर्तरूप हैं। शास्त्रीय संबंध सीधा है: ऊर्जा का दिवस ऊर्जा-देवता को समर्पित।

व्रत विशेष रूप से अनुशंसित — जिनके जन्म-कुंडली में मंगल दोष हो, न्यायालय अथवा सम्पत्ति-विवाद, रक्त-पेशी सम्बंधी स्वास्थ्य-चिंता, भय-व्याकुलता काल में साहस-संवर्धन हेतु।

सरल विधि

  1. 1**प्रात:स्नान**, स्वच्छ वस्त्र (लाल अथवा गेरुआ — मंगलवार का परंपरागत रंग)।
  2. 2**हनुमान पूजा** — गृह-मंदिर अथवा हनुमानालय में। शास्त्रीय अर्पण: सिंदूर (सरसों तेल मिश्रित, मूर्ति पर लेपित), लाल पुष्प (गेंदा, गुड़हल), बूंदी-लड्डू अथवा गुड़-चना प्रसाद।
  3. 3**पाठ** — हनुमान चालीसा (40 दोहे) सार्वत्रिक। दीर्घ-पाठ अभ्यासी सुंदरकांड (रामायण का पंचम काण्ड) मंगलवार को पढ़ते हैं।
  4. 4**लघु उपवास** — मध्याह्न अथवा संध्या एक भोजन, नमक-तेल-लहसुन-प्याज वर्जित। कुछ केवल फल-दूध।
  5. 5**दान** — वानरों को चना खिलाना, मिठाई एवं लाल वस्त्र दान।

अंतर्भाव

हनुमान का गुण है निरहंकार सेवा। मंगलवार व्रत अनुष्ठान के परे एक अवसर है — किसी अदृश्य सेवा-कार्य का। पड़ोसी की मूक सहायता, घर का एक कार्य जो प्रायः कोई और करता है, एक दिन की किसी सुख-वस्तु का त्याग। हनुमान-कृपा सेवा करनेवालों की ओर बहती है, केवल माँगनेवालों की ओर नहीं।

सावधानी

व्रत को रोग अथवा कानूनी संकट का गारंटीशुदा निदान न मानें। व्रत भक्ति-अनुशासन है; वह चिकित्सक-अधिवक्ता के स्थान पर नहीं, उनके साथ है। नियमित साप्ताहिक लय से मास-दर-मास मनोदशा एवं संकल्प में मापनीय परिवर्तन आता है — यही व्यावहारिक दावा है।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान को सिंदूर क्यों अर्पित किया जाता है?

तुलसीदास-परंपरा की कथा: हनुमान ने सीता को सिंदूर लगाते देखा, कारण पूछा; सीता ने कहा यह राम की दीर्घायु हेतु है। हनुमान ने उसी कामना से सम्पूर्ण शरीर पर सिंदूर लगा लिया। अर्पण उनकी अप्रतिम भक्ति का स्मरण है।

क्या स्त्रियाँ मंगलवार व्रत रख सकती हैं?

हाँ। कोई लिंग-निषेध नहीं। कुछ परंपराएँ रजोदर्शन-दिनों में विराम कहती हैं, अन्य निरंतर पालन। दोनों आचार प्रचलित एवं शास्त्र-सम्मत हैं।

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