2026 की प्रदोष-व्रत तिथियाँ

2026 की प्रदोष-व्रत तिथियाँ

शिव-पार्वती को प्रसन्न करने वाला त्रयोदशी-व्रत — प्रत्येक पक्ष में एक

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25 तिथियाँ — पूर्ण वर्ष

शिव-पार्वती को प्रसन्न करने वाला त्रयोदशी-व्रत — प्रत्येक पक्ष में एक

प्रथम-प्रदोष

1 जन॰गुरु

सोम-प्रदोष श्रेष्ठ

27 जूनशनि

अन्तिम-प्रदोष

21 दिस॰सोम

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व्रत-परिचय

प्रदोष-व्रत — प्रत्येक मास के शुक्ल एवं कृष्ण-पक्ष की त्रयोदशी को पारम्परिक रूप से किया जाने वाला शिव-व्रत। वर्ष में 24 प्रदोष।

वार के अनुसार विशिष्ट-नाम: सोम-प्रदोष (पुत्र-कामना-शुभ), भौम-प्रदोष (ऋण-व्याधि-नाश), शनि-प्रदोष (सर्वोत्तम — शनि-पीड़ा-शान्ति)।

सूर्यास्त-पश्चात् लगभग 45 मिनट + 45 मिनट = कुल 1.5 घण्टे की अवधि "प्रदोष-काल" — पूजा का श्रेष्ठ-समय।

📅

जनवरी

3 दिन
1जन॰गुरु

🌖 शुक्लतिथि 13

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16जन॰शुक्र

🌒 कृष्णतिथि 13

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30जन॰शुक्र

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

फरवरी

1 दिन
14फ़र॰शनि

🌒 कृष्णतिथि 13

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📅

मार्च

3 दिन
1मार्चरवि

🌖 शुक्लतिथि 13

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16मार्चसोम

🌒 कृष्णतिथि 13

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30मार्चसोम

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

अप्रैल

2 दिन
15अप्रैलबुध

🌒 कृष्णतिथि 13

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28अप्रैलमंगल

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

मई

2 दिन
14मईगुरु

🌒 कृष्णतिथि 13

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28मईगुरु

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

जून

2 दिन
12जूनशुक्र

🌒 कृष्णतिथि 13

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27जूनशनि

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

जुलाई

2 दिन
12जुल॰रवि

🌒 कृष्णतिथि 13

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26जुल॰रवि

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

अगस्त

2 दिन
10अग॰सोम

🌒 कृष्णतिथि 13

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25अग॰मंगल

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

सितम्बर

2 दिन
8सित॰मंगल

🌒 कृष्णतिथि 13

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24सित॰गुरु

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

अक्टूबर

2 दिन
8अक्टू॰गुरु

🌒 कृष्णतिथि 13

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23अक्टू॰शुक्र

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

नवम्बर

2 दिन
6नव॰शुक्र

🌒 कृष्णतिथि 13

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22नव॰रवि

🌖 शुक्लतिथि 13

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📅

दिसम्बर

2 दिन
6दिस॰रवि

🌒 कृष्णतिथि 13

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21दिस॰सोम

🌖 शुक्लतिथि 13

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पूजन-विधि

  1. 1

    दिनभर निर्जल अथवा एकाहार उपवास। सायं स्नान-शुद्ध।

  2. 2

    श्वेत-वस्त्र। उत्तर-दिशा-मुख। शिव-पार्वती-नन्दी की प्रतिमा अथवा शिवलिंग।

  3. 3

    पञ्चामृत-स्नान। श्वेत-पुष्प, बेल-पत्र, धतूरा, भङ्ग, चन्दन, अक्षत।

  4. 4

    महामृत्युञ्जय-मन्त्र 108 बार। प्रदोष-स्तोत्र पाठ। आरती।

प्रश्न-उत्तर

Q. सोम-प्रदोष का विशेष-माहात्म्य?

सोम = चन्द्र — शिव के मस्तक पर विराजमान। सोमवार + प्रदोष = परम-शुभ-संयोग। पुत्र-प्राप्ति, मनोवाञ्छित-कार्य-सिद्धि।

Q. प्रदोष-व्रत में जल पी सकते हैं?

दोनों-प्रकार से किया जाता है: निर्जल (सर्वश्रेष्ठ) अथवा एकाहार (केवल फल-दूध)। प्रदोष-काल-पूजन-पश्चात् सात्विक-भोजन।