✦ — सूर्य का बारह राशियों में परिक्रमण — ✦
सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश संक्रान्ति कहलाता है। वर्ष में 12 संक्रान्तियाँ होती हैं — प्रति माह एक। यह दिन स्नान, दान, पूजा हेतु अति शुभ है।
संक्रान्ति के 6-16 घंटे पहले व बाद का समय "पुण्य काल" कहलाता है — स्नान, दान, मंत्र जाप का सर्वोत्तम समय। इस काल में पवित्र नदी स्नान विशेष फलदायक है।
Dhanu → Makara
— महत्व —
उत्तरायण प्रारम्भ, फसल पर्व
Makara → Kumbha
— महत्व —
अध्यात्म, माघ स्नान समाप्ति
Kumbha → Meena
— महत्व —
खरमास समाप्ति
Meena → Mesha
— महत्व —
सौर नववर्ष — विशु, बिहू, पुथांडु
Mesha → Vrishabha
— महत्व —
ग्रीष्म ऋतु प्रारम्भ
Vrishabha → Mithuna
— महत्व —
मानसून आगमन, राजा पर्व
Mithuna → Karka
— महत्व —
दक्षिणायन प्रारम्भ
Karka → Simha
— महत्व —
सूर्य स्वगृह में — बल पूर्ण
Simha → Kanya
— महत्व —
विश्वकर्मा पूजा, पितृ पक्ष निकट
Kanya → Tula
— महत्व —
सूर्य नीच, कार्तिक प्रारम्भ
Tula → Vrishchika
— महत्व —
मंगल काल — तीव्र ऊर्जा
Vrishchika → Dhanu
— महत्व —
खरमास प्रारम्भ — शुभ कार्य रुके
— सूर्य संक्रान्ति शुभ हो, स्नान-दान फलदायी हो —
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