✦ 16 उपचारों से देवता पूजन की सम्पूर्ण विधि ✦
षोडशोपचार पूजा वैदिक 16-उपचार पद्धति है — आवाहन से प्रदक्षिणा तक। पञ्चोपचार 5 संक्षिप्त उपचार। प्रत्येक उपचार में मंत्र व सामग्री अर्पण होती है।
✦ नित्य पूजा से देवता प्रसन्न ✦
आवाहन
✦ देवता का आह्वान ✦
आसन
✦ आसन अर्पण ✦
पाद्य
✦ चरण प्रक्षालन ✦
अर्घ्य
✦ हस्त जल अर्पण ✦
आचमनीय
✦ आचमन जल ✦
स्नान
✦ अभिषेक स्नान ✦
वस्त्र
✦ वस्त्र अर्पण ✦
यज्ञोपवीत
✦ जनेऊ अर्पण ✦
गन्ध
✦ चन्दन लेप ✦
पुष्प
✦ पुष्प अर्पण ✦
धूप
✦ धूप अर्पण ✦
दीप
✦ दीप प्रज्वलन ✦
नैवेद्य
✦ भोग अर्पण ✦
ताम्बूल
✦ पान-सुपारी ✦
दक्षिणा
✦ दक्षिणा अर्पण ✦
प्रदक्षिणा व नमस्कार
✦ परिक्रमा व साष्टांग प्रणाम ✦
✦ यदि 16 उपचार सम्भव न हों तो ये 5 उपचार पर्याप्त हैं
1गन्ध — चन्दन लेप
2पुष्प — पुष्प अर्पण
3धूप — अगरबत्ती / धूप
4दीप — घी/तेल दीपक
5नैवेद्य — भोग (फल, मिठाई)
कलश (ताम्बे या पीतल)
दीपक, बत्ती, घी/तेल
अगरबत्ती, धूपबत्ती
कुमकुम, हल्दी, अक्षत
चन्दन, जनेऊ, कलावा
ताजे पुष्प, तुलसी दल
नारियल, सुपारी, लौंग
प्रसाद (फल, मिठाई)
ब्रह्म मुहूर्त (4:00-5:30 AM) — सर्वोत्तम
सूर्योदय काल (6:00-7:00 AM) — उत्तम
सन्ध्या काल (सूर्यास्त) — शिव पूजा हेतु
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
✦ पूजा से पूर्व शुद्धि मंत्र ✦
✦ — पूजा से पवित्रता · पवित्रता से शान्ति — ✦
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