पूजा-व्रत के पूर्व बोले जाने वाला पूर्ण सङ्कल्प मन्त्र — आज के पञ्चाङ्ग, स्थान व व्यक्ति-विवरण सहित
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। श्रीमद् भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य ब्रह्मणो द्वितीय परार्धे श्वेतवाराह कल्पे वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलि-प्रथम-चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे आर्यावर्तैकदेशे राजस्थान-राज्ये Delhi-नगरे 2083 (सिद्धार्थी) नाम संवत्सरे उत्तरायण अयने ग्रीष्म ऋतौ ज्येष्ठ अधिक मासे शुक्ल पक्षे चतुर्थी तिथौ सौम्य वासरे आर्द्रा नक्षत्रे शूल योगे विष्टि करणे एवं गुणविशेषणविशिष्टायां शुभपुण्यतिथौ काश्यप-गोत्रोत्पन्नः अमुक शर्मा अहं सर्व-पाप-निवृत्ति-पूर्वकम् कामनया सत्यनारायण-व्रत करिष्ये।
◈ नोट: यह सङ्कल्प चुनी हुई तिथि की तिथि, नक्षत्र, योग, करण के अनुसार निर्मित है। आगामी पूजा/व्रत के लिए सही तिथि चुन कर अपना विवरण भरें तथा कॉपी बटन दबाकर सेव कर लें। पूजा प्रारम्भ करने से पूर्व इसका पाठ करें।
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